यशस्वी कन्नौजिया संवाददाता
सोनभद्र। जनपद के जुगैल थाना क्षेत्र में वर्षों पुराने एक सड़क हादसे से जुड़े मामले में हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। हादसे की जिम्मेदारी से बचने के लिए सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार और मामले की जांच कर रहे विवेचक पर मिलकर साक्ष्य बदलने और निर्दोष वाहन को केस में फंसाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि हादसे में शामिल जेसीबी की जगह एक ऐसे वाहन का नंबर दर्ज करा दिया गया, जो उस समय सोनभद्र में मौजूद ही नहीं था। मामले में वाहन स्वामी की जानकारी के बिना फर्जी हस्ताक्षर किए गए, कूटरचित आरसी और आधार कार्ड का सहारा लेकर मोटर दुर्घटना दावा से जुड़ी पूरी कार्रवाई करवा ली गई। इतना ही नहीं, थाने में बंद वाहन को छुड़ाने के लिए न्यायालय में दिए जाने वाले वचन पत्र में भी किसी अन्य व्यक्ति की फोटो चस्पा कर दी गई। आपराधिक प्रक्रिया से जुड़ा नोटिस मिलने के बाद ही वाहन स्वामी को पूरे मामले की जानकारी हो सकी।
इसके बाद पीड़ित वाहन स्वामी ने कचहरी पहुंचकर अभिलेखों की जांच की और पूरे प्रकरण की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जुगैल थाने में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला वर्ष 2019 का बताया जा रहा है। 28 फरवरी 2019 को बड़गांवा निवासी तेजबली यादव ने जुगैल पुलिस को सूचना दी थी कि उनके गांव में सड़क निर्माण के दौरान जेसीबी की लापरवाही से बिजली का पोल टूटकर सड़क पर गिर गया, जिससे उनका बेटा रामसकल झुलस गया। उस समय पुलिस ने जेसीबी चालक और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मशीन को थाने में जब्त कर लिया था।
अब सामने आए आरोपों के अनुसार मिर्जापुर निवासी विकास कुमार गुप्ता का कहना है कि विवेचना के दौरान गलत तरीके से उनकी जेसीबी का नंबर दर्ज कर दिया गया, जबकि उनकी मशीन का उपयोग कभी भी सोनभद्र या किसी अन्य जिले में किराये पर नहीं किया गया था। जेसीबी का इस्तेमाल केवल उनके ईंट भट्ठे में निजी कार्यों के लिए होता था।
आरोप है कि उन्हें बिना जानकारी दिए दुर्घटना दावा मामले में पक्षकार बना दिया गया और एकतरफा कार्रवाई कर ली गई। बाद में पता चला कि 25 जून 2019 को दाखिल चार्जशीट में उनके वाहन का उल्लेख किया गया है। फाइल की जांच में उनके नाम से बिना तारीख का फर्जी प्रार्थना पत्र, जाली हस्ताक्षर, चालक के नाम का गलत उल्लेख और फर्जी आधार कार्ड संलग्न पाया गया। इतना ही नहीं, थाने में खड़ी जेसीबी को रिलीज कराने के लिए 15 अप्रैल 2019 को जारी आदेश में यह दर्शाया गया कि वाहन के मूल कागजात न्यायालय में जमा किए गए, जबकि ऐसा कभी किया ही नहीं गया। वचन पत्र पर भी फर्जी हस्ताक्षर और किसी अन्य व्यक्ति की फोटो लगी हुई पाई गई। मामले में विवेचक और ठेकेदार पर गंभीर फर्जीवाड़े के आरोप लगाए गए हैं। प्रभारी निरीक्षक के अनुसार शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है।