रिपोर्ट: डॉ. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव
सोनभद्र। जनपद के उरमौरा स्थित होटल वैभव में 3 जनवरी को संयुक्त श्रीमाली महासभा के तत्वावधान में माता सावित्रीबाई फुले की जयंती उल्लासपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान “नारी शिक्षा जिंदाबाद” और “सावित्रीबाई फुले अमर रहें” जैसे नारों के साथ उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।नइस अवसर पर मुख्य अतिथि कौशल शर्मा ने कहा कि सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने उस दौर में शिक्षा की ज्योति जलाई जब महिलाओं का पढ़ना सामाजिक अपराध माना जाता था। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई केवल शिक्षिका नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति और नारी मुक्ति आंदोलन की प्रतीक थीं। उनका संपूर्ण जीवन वंचित वर्ग, विशेषकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में समर्पित रहा।
जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर श्रीमाली ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले को शिक्षा के माध्यम से समाज के सशक्तिकरण पर अटूट विश्वास था। उन्होंने बताया कि अकाल के समय जरूरतमंदों के लिए अपने घर के द्वार खोलना और प्लेग के दौरान स्वयं सेवा में जुट जाना उनके सामाजिक न्याय और मानवता के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। पूर्व जिला अध्यक्ष हरभजन सिंह ने कहा कि सावित्रीबाई फुले एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार हैं। उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा और अंधविश्वास का खुलकर विरोध किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि शिक्षा से ही समाज में समानता आएगी और राष्ट्र मजबूत होगा। कार्यक्रम में चंद्रशेखर श्रीमाली, अवधेश शर्मा, राजकुमार शर्मा, हरभजन सिंह, कौशल शर्मा, रमेश श्रीमाली, वैभव शर्मा, अनुभव शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।