मनीष कुमार संवाददाता
दुद्धी(सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश की आखिरी विधानसभा दुद्धी (403) से आठ बार विधायक रहे विजय सिंह गोंड का गुरुवार को निधन हो गया। किडनी की गंभीर बीमारी से लंबे समय से जूझ रहे विजय सिंह गोंड ने लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही दुद्धी विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे सोनभद्र जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, शुभचिंतकों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन को क्षेत्र की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। विजय सिंह गोंड पिछले कुछ वर्षों से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज लखनऊ पीजीआई में चल रहा था। चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद गुरुवार सुबह उनका निधन हो गया। जैसे ही यह खबर क्षेत्र में पहुंची, आदिवासी बहुल इलाकों में शोक की लहर छा गई। लोग उन्हें एक जननेता, मार्गदर्शक और आदिवासी समाज की मजबूत आवाज के रूप में याद कर रहे हैं।
कई दलों से जीत, जनता से अटूट रिश्ता
विजय सिंह गोंड का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने पहली बार वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद1985 में कांग्रेस, 1989 में निर्दल,1991 और 1993में जनता दल,1996 और 2002 व फिर बीच में उन्हें हार का सामना करना 2017 में उन्होंने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव लाडा जहां भारतीय जनता पार्टी एवं अपना दल एस के प्रत्याशी हरिराम चेरों ने उन्हें 1084 वोटो से हराया, और 2017 से लेकर 2022 तक दुद्धी विधानसभा की जनता का हरिराम चेरों ने सेवा किया, 2022 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रामदुलारे गौड को टिकट दिया गया जिसमें विजय सिंह गौड़ समाजवादी पार्टी से टिकट ले चुनाव लड़ा और लगभग 6297 वोट से उनकी हार हुई और बीजेपी का पहली बार दुद्धी में विधायक चुना गया पड़ा लगभग 2 साल के बाद विधायक रामदुलारे गौड को नाबालिक से दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनाकर जेल भेजे जाने के बाद विधानसभा 403 की सीट खाली हो गई थी,जिसको लेकर उपचुनाव हुआ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी श्रवण गोड एवं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी विजय सिंह गोड में जबरदस्त चुनावी मुकाबला हुआ जिसमें भाजपा के प्रत्याशी सरवन सिंह गौड को लगभग 3208 मतों से 2024 मे हराकर जीत दर्ज कर किया, इस तरह से उन्होंने आठ बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। विभिन्न राजनीतिक दलों से चुनाव जीतने के बावजूद उनकी पहचान हमेशा एक जमीनी नेता के रूप में बनी रही। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में वे राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। आदिवासी बाहुल्य और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुद्धी क्षेत्र की समस्याओं को वे बखूबी समझते थे। यही कारण था कि आदिवासी समाज में उनकी गहरी पैठ मानी जाती थी
अंतिम संस्कार की तैयारी
समाजवादी पार्टी विधानसभा अध्यक्ष अवध नारायण यादव ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र के कटौली गांव उनके निवास स्थान गाँव के शमशान घाट पर किया जाएगा। जहां आमजन, समर्थक और राजनीतिक नेता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।