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Wednesday 10th September 2025 12:48:00 PM

रिहन्द बाँध: एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील में से एक, सोनभद्र का गौरव

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  सौरभ की रिपोर्ट

- इसे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत की स्मृति में नामित किया गया

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के पिपरी क्षेत्र में रेनूकोट-शक्तिनगर मार्ग पर स्थित रिहन्द बाँध राज्य ही नहीं बल्कि देश की ऊर्जा और सिंचाई व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बाँध रेनूकोट से लगभग पाँच किलोमीटर और सोन नदी संगम स्थल से करीब 46 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका भूगोल छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की दक्षिणी पहाड़ियों से भी सटा हुआ है।


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रिहन्द नदी पर बने इस बाँध से निर्मित जलाशय को गोविंद बल्लभ पंत सागर कहा जाता है। यह जलाशय लगभग 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसे भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में गिना जाता है। इस डैम में कुल 13 फाटक है, जिनसे जलस्तर बढ़ने पर समय समय पर पानी की निकासी को जाती है।इस बांध का जलग्रहण क्षेत्र उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैला हुआ है, जबकि यह नदी के निचले हिस्से में स्थित बिहार में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है।

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बाँध का निर्माण कार्य वर्ष 1954 में शुरू हुआ था। इसकी आधारशिला देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। लगभग नौ वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद 6 जनवरी 1963 को 91.44 मीटर ऊँचाई और 934.21 मीटर लंबाई वाले इस कंक्रीट ग्रेविटी बाँध का निर्माण पूरा हुआ। इसे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत की स्मृति में नामित किया गया।

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रिहन्द बाँध से जलविद्युत उत्पादन की भी बड़ी व्यवस्था है। यहां लगे 6 टरबाइन यूनिट्स के माध्यम से कुल 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। इसका संचालन उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम लिमिटेड करता है।

बाँध में कुल 61 संयुक्त और स्वतंत्र ब्लॉक बनाए गए हैं। यहाँ संचित जल से साल भर सिंचाई होती है, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को जीवनदान मिलता है।

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बांध के निर्माण के परिणामस्वरूप लगभग 1,00,000 लोगों को जबरन विस्थापित होना पड़ा। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कई सुपर थर्मल पावर स्टेशन स्थित हैं। ये हैं सिंगरौली, विंध्याचल, रिहंद, अनपरा और सासन सुपर थर्मल पावर स्टेशन और रेणुकूट थर्मल स्टेशन। इन कोयला आधारित बिजलीघरों के राख के ढेर (कुछ जलाशय क्षेत्र में स्थित हैं) से उच्च क्षारीयता वाला बहता पानी अंततः इस जलाशय में जमा होता है, जिससे इसके पानी की क्षारीयता और pH बढ़ जाता है। सिंचाई के लिए उच्च क्षारीयता वाले पानी का उपयोग करने से कृषि क्षेत्र परती क्षारीय मिट्टी में बदल जाते हैं।




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