रिपोर्ट: डॉ. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव
सोनभद्र। उपायुक्त प्रशासन राज्य कर सोनभद्र की ओर से कलेक्ट्रेट सभागार में व्यापारी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जीएसटी विभाग के अधिकारी, विभिन्न व्यापार संगठनों के पदाधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अधिवक्तागण मौजूद रहे। इस दौरान व्यापारियों ने जीएसटी से संबंधित अपनी समस्याओं और सुझावों को साझा किया। कार्यक्रम के अवसर पर व्यापारियों की जीएसटी संबंधी मांगों को भारत सरकार के नाम संबोधित पत्र अधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किया गया। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र के जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि बिना व्यापारी का पक्ष सुने विभाग द्वारा बोगस डिमांड जारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई मामलों में डिमांड शून्य होने के बावजूद व्यापारियों की शेष आईटीसी को समायोजित कर लिया गया, जबकि डिमांड जीरो होने पर आईटीसी वापस नहीं की गई। उन्होंने जीएसटी ट्रिब्यूनल के शीघ्र गठन, उत्तर प्रदेश में बेंच स्थापित किए जाने, ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराने तथा लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि जीएसटी कानून में लिमिटेशन एक्ट की स्पष्ट और एकरूप व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग धाराओं में अलग समय सीमा होने से करदाताओं में भ्रम की स्थिति बनती है और तकनीकी कारणों से वे अपील और राहत से वंचित रह जाते हैं। कौशल शर्मा ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यापारी व्यक्तिगत कारणों से समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता और जीएसटीआर-3बी या जीएसटीआर-1 समय पर नहीं भर पाता है, तो धारा 46 के तहत नोटिस देकर 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए। लेकिन कई मामलों में 15 दिन पूरे होने से पहले ही धारा 125 के तहत 25,000 रुपये का अधिकतम अर्थदंड लगा दिया गया, जबकि अधिकारी परिस्थितियों को देखते हुए इस दंड को कम या माफ भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यापारी पहले ही लेट फीस और ब्याज का भुगतान कर रहा है, तो अतिरिक्त अर्थदंड लगाया जाना उचित नहीं है।
बैठक में व्यापार संगठन के नगर अध्यक्ष प्रशांत जैन, व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला अध्यक्ष नरेंद्र गर्ग, प्रदेश मंत्री विमल अग्रवाल, चंदन केसरी, व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष रमेश जायसवाल, संदीप सिंह और आनंद जायसवाल सहित अन्य व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।