राजेश पाठक विधि संवाददाता
सोनभद्र। साढ़े 11 वर्ष पूर्व दलित महिला को पति के घायल होने की झूठी सूचना देकर विद्यालय ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने सुनवाई के बाद नंदलाल, कांग्रेस और विनय सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों पर 60-60 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर प्रत्येक दोषी को 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
• अर्थदंड की राशि से पीड़िता को मिलेगी सहायता
अभियोजन के अनुसार 22 जुलाई 2014 को करमा क्षेत्र की एक दलित महिला को आरोपियों ने उसके पति के घायल होने की झूठी जानकारी देकर साथ चलने को कहा और एक विद्यालय में ले जाकर बारी-बारी से दुष्कर्म करने का आरोप लगा। शिकायत के बावजूद शुरुआत में कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर 5 सितंबर 2014 को दुष्कर्म, लूट और एससी/एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में 6 गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया। साथ ही आदेश दिया कि अर्थदंड की कुल राशि में से 90 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सी शशांक शेखर कात्यायन ने पैरवी की।