सौरभ की रिपोर्ट
घोरावल(सोनभद्र)। क्षेत्र के कुशहरा में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर व्यास मानस मयूर पण्डित गणेश देव पाण्डेय ने श्रीराम कथा के माध्यम से तीर्थराज प्रयाग की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। कथा में भारद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए श्रीराम के स्वरूप पर गूढ़ चर्चा की गई। याज्ञवल्क्य ने कहा कि श्रीराम की कथा चंद्रमा की किरणों के समान मनोहारी और शीतलता प्रदान करने वाली है। इस दौरान शिव-पार्वती संवाद और सती प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसमें दक्ष यज्ञ में अपमान से आहत सती द्वारा यज्ञ कुंड में आत्मदाह करने की कथा सुनाई गई।
• भक्ति में सच्चे भाव की महिमा और भगवान के अवतारों का वर्णन
कथा के दौरान श्रीधाम वृंदावन से आए पण्डित नैतिक मिश्र ने भगवान के 24 अवतारों, समुद्र मंथन, ध्रुव चरित और विदुर चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। व्यास ने बताया कि परमात्मा की भक्ति निर्लिप्त भाव से करनी चाहिए, क्योंकि ईश्वर केवल सच्चे भाव के भूखे होते हैं। यज्ञाचार्य के रूप में ज्योतिषाचार्य पण्डित हरिराम मिश्र मौजूद रहे, जबकि मुख्य यजमान प्रेमनाथ पाण्डेय और उषा पाण्डेय रहे। कार्यक्रम का संचालन उमेश चन्द्र पाण्डेय ने किया, जिसमें कमलेश मिश्र, प्रशांत मिश्र, विनोद तिवारी, रामानंद पाण्डेय, अंकुल मिश्र, रवि चौबे, कृष्ण कुमार मिश्र, उमेश शुक्ल, संतोष तिवारी, रोहित मिश्र, यीशु पाण्डेय, लवकुश पाठक और आचार्य प्रशांत तिवारी सहित कई लोग उपस्थित रहे।