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सोनभद्र। अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल सोनभद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत की। सम्मेलन में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने के साथ ही अनुप्रिया पटेल ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। सीमित राजनीतिक ताकत के बावजूद सरकार से कई महत्वपूर्ण फैसले कराने का दावा करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को और मजबूत करने की अपील की। वहीं 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने NDA को मजबूत करने और अधिक से अधिक सीटों पर गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने को पार्टी की प्राथमिकता बताया। सोनभद्र में अपना दल की राजनीतिक दावेदारी को लेकर भी उनके दौरे को अहम माना जा रहा है। अनुप्रिया पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि 403 विधानसभा सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपना दल एस की राजनीतिक ताकत सीमित है, वहीं लोकसभा की 543 सीटों में पार्टी का सिर्फ एक सांसद है। इसके बावजूद सीमित राजनीतिक ताकत के साथ भी अपना दल ने सरकार से कई महत्वपूर्ण फैसले कराने का काम किया है। उन्होंने 403 विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के सिर्फ 13 सदस्यों का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन और सदस्य संख्या को बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक ताकत जितनी मजबूत होगी, विधानसभा और संसद में जनता की आवाज भी उतनी ही मजबूत होगी। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।
आउटसोर्सिंग की नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को लेकर अनुप्रिया पटेल ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी पार्टियां सत्ता में आने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की बात कर रही हैं, लेकिन जब सपा सत्ता में थी तब उसने आउटसोर्सिंग खत्म क्यों नहीं की। अनुप्रिया पटेल ने दावा किया कि अपना दल ने गठबंधन के भीतर रहते हुए आउटसोर्सिंग की नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था लागू कराने का मुद्दा उठाया और इसे लागू कराया।
PDA के मुद्दे पर भी अनुप्रिया पटेल ने सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए समाजवादी पार्टी को PDA की चिंता नहीं थी, लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद अब PDA की बात की जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से ऐसी बातों से भ्रमित नहीं होने की अपील की। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जो लोग सामाजिक न्याय और PDA की बात करते हैं, वे सत्ता में रहते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा में आरक्षण लागू नहीं करा सके। उन्होंने दावा किया कि अपना दल के संसद में पहुंचने के बाद NEET में आरक्षण का मुद्दा मजबूती से उठाया गया और आरक्षण लागू कराने की दिशा में काम किया गया
जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी अनुप्रिया पटेल ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन दलों ने जातिगत जनगणना कराने की बात कही, वे उसके आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सामाजिक न्याय और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है, लेकिन जनता को ऐसी राजनीति का जवाब देना होगा। यश भारती पुरस्कार का जिक्र करते हुए भी अनुप्रिया पटेल ने सपा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब सपा सत्ता में थी तो यश भारती पुरस्कार दिए जाते थे, लेकिन यह बताना चाहिए कि कितने दलितों और पटेल समाज के लोगों को सम्मान देने का काम किया गया। उन्होंने विपक्ष पर बार-बार जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। सोनभद्र की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी अनुप्रिया पटेल का रुख साफ नजर आया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के तहत अपना दल एस को दुद्धी विधानसभा सीट मिली थी, जबकि 2022 के चुनाव में सोनभद्र की किसी भी विधानसभा सीट पर अपना दल को टिकट नहीं मिला था। अब 2027 के चुनाव से पहले सोनभद्र की दो विधानसभा सीटों पर अपना दल की दावेदारी की चर्चा के बीच अनुप्रिया पटेल का यह सम्मेलन पार्टी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अनुप्रिया पटेल ने कहा कि यह आपसी बातचीत और पिछली चुनावी स्थिति के आधार पर तय होगा। उन्होंने साफ किया कि अपना दल एस की प्राथमिकता NDA को मजबूत करना और अधिक से अधिक सीटों पर NDA की जीत सुनिश्चित करना है, ताकि एक बार फिर NDA की सरकार बन सके। UGC और आरक्षण के मुद्दे पर सवर्ण समाज में कथित नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल पर अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मामला अभी न्यायालय में है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी समाज में नाराजगी नहीं है और इसे लेकर सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है।
अनुप्रिया पटेल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि इस बार उन्हें जनता का साथ चाहिए। उन्होंने कहा कि आज अपना दल की राजनीतिक ताकत सीमित है, लेकिन अगर इसे और मजबूत किया गया तो संसद और विधानसभा में जनता की आवाज और हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
सोनभद्र में आयोजित यह कार्यकर्ता सम्मेलन सिर्फ संगठन को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपना दल एस की रणनीति और गठबंधन में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने के संकेत भी देता नजर आया। अब देखना होगा कि चुनाव से पहले सोनभद्र में भाजपा और अपना दल के बीच सीटों को लेकर क्या नया समीकरण सामने आता है।