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  रघुराज सिंह संवाददाता

• ध्वजारोहण, उपलब्धियों का लेखा-जोखा और भविष्य की योजनाओं पर हुआ मंथन

सोनभद्र(बीजपुर)। एनटीपीसी रिहंद के 44वें स्थापना दिवस के अवसर पर परियोजना परिसर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशासनिक भवन में मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रमुख संजय असाटी द्वारा एनटीपीसी ध्वज फहराकर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 1983 को भूमि पूजन के साथ रिहंद स्टेज-I की नींव रखी गई थी और मार्च 1988 में इसका वाणिज्यिक संचालन शुरू हुआ। 500 मेगावाट की प्रारंभिक क्षमता से शुरू हुई यह परियोजना आज 3,000 मेगावाट क्षमता वाली सुपर थर्मल पावर परियोजना बन चुकी है, जो उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी परियोजना है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में 20 मेगावाट की सोलर आधारित अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है।


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उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8 फरवरी 2026 तक परियोजना ने 81.80 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (PLF) के साथ 18,494.04 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया है, जबकि जनवरी 2026 तक 81.97 प्रतिशत PLF के साथ यह एनटीपीसी परियोजनाओं में चौथे स्थान पर रही। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अब तक 41,000 पौधों का रोपण किया जा चुका है तथा 9,000 मियावाकी वृक्षारोपण प्रस्तावित है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग के साथ 50,000 पौधारोपण हेतु एमओयू किया गया है। सामाजिक दायित्वों के तहत परियोजना परिसर स्थित डीएवी विद्यालय में जेम (GEM) योजना के अंतर्गत 70 बालिकाओं का निःशुल्क प्रवेश कराया गया है। एनटीपीसी रिहंद को सीएसआर एवं ईएमजी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जिनका श्रेय कर्मठ और समर्पित कर्मचारियों को दिया गया।




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