रिपोर्ट: डॉ. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव
सोनभद्र(ओबरा)। जिले में आयकर विभाग की कार्रवाई अब पारंपरिक छापेमारी से आगे बढ़कर हाईटेक मोड में पहुंच गई है। खनन क्षेत्र में पहली बार ड्रोन कैमरों और सेटेलाइट तकनीक के जरिए खदानों की जियो-मैपिंग कराई जा रही है। जिला खनिज विभाग से प्राप्त पट्टों के दस्तावेजों के आधार पर तकनीकी टीम वास्तविक खनन क्षेत्र और स्वीकृत सीमा का मिलान कर रही है। शिकायतों में आरोप था कि कई खदानों में तय मानकों से अधिक गहराई तक खुदाई की गई है। इसी आधार पर प्रदेशभर में एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें सोनभद्र सबसे बड़े फोकस पर है। करीब 25 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे अधिकारियों ने पहले चरण में आधा दर्जन से अधिक खनन कारोबारियों के आवास और प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए कई वाहनों पर शादी समारोह के स्टिकर लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की अलग-अलग नंबर प्लेट वाली गाड़ियों की मौजूदगी ने पूरे ऑपरेशन को और चर्चा में ला दिया।
वाराणसी जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रांजल सिंह के नेतृत्व में प्रदेशभर में 20 से अधिक स्थानों पर जांच चल रही है, जबकि अकेले सोनभद्र में लगभग 14 ठिकाने रडार पर बताए जा रहे हैं। करीब 100 अधिकारी अलग-अलग टीमों में बंटकर डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटा रहे हैं। पत्थर की खदानों का स्थलीय निरीक्षण कर ड्रोन के जरिए पूरे एरिया की जीपीएस मैपिंग की जा रही है, जिससे वास्तविक खुदाई और स्वीकृत सीमा का सटीक मिलान हो सके। छात्र शक्ति डाला लंगड़ा मोड़ स्थित बंद पड़ी खदान, जिसका संबंध बसपा विधायक उमाशंकर सिंह से बताया जा रहा है, वहां भी टीम ने दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों ने औपचारिक बयान देने से परहेज किया, लेकिन स्पष्ट किया कि मानकविहीन खनन की शिकायतों पर गहन पड़ताल जारी है। शादी के स्टिकर लगी गाड़ियों से शुरू हुआ यह ऑपरेशन अब प्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी जांच के रूप में सामने है, जिससे सोनभद्र के खनन कारोबार में सन्नाटा और बेचैनी साफ देखी जा रही है।