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सोनभद्र। बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए जनपद सोनभद्र में निपुण विद्यालय मूल्यांकन परीक्षा के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सोनभद्र स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय सभागार में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पाण्डेय ने निपुण घोषित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की और शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीएसए ने बताया कि जनपद के कुल 1,761 मूल्यांकित विद्यालयों के 34,692 छात्रों का आकलन किया गया, जिनमें से 27,250 छात्र, अर्थात लगभग 78.5 प्रतिशत, निपुण दक्षताओं में सफल पाए गए हैं। यह उपलब्धि न केवल जिले के शिक्षकों की मेहनत को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि बुनियादी भाषा और गणितीय कौशलों के विकास की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि कक्षा 1 में 79.1 प्रतिशत और कक्षा 2 में 77.9 प्रतिशत छात्रों ने अपेक्षित दक्षता प्राप्त की है, जिसके परिणामस्वरूप सोनभद्र जनपद प्रदेश के शीर्ष 20 जनपदों में स्थान बनाने में सफल रहा है।
जिला समन्वयक जय किशोर वर्मा ने आगामी सत्र कि योजना पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान सत्र में केवल 676 विद्यालय, यानी 38.39 प्रतिशत ही पूर्ण रूप से ‘निपुण विद्यालय’ घोषित हो सके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि आगे और सुधार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दिया कि जनपद में 351 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां केवल एक छात्र के निपुण बनने से पूरा विद्यालय निपुण घोषित हो सकता है। इसे उन्होंने ‘क्विक विन’ अवसर बताते हुए इन विद्यालयों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ब्लॉकों, विशेषकर रॉबर्ट्सगंज में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जहां केवल 1 या 2 छात्रों की कमी के कारण वे निपुण घोषित नहीं हो पाए हैं। वहीं, घोरावल और नगवां जैसे ब्लॉकों में अपेक्षाकृत अधिक सुधार की आवश्यकता है, जहां आधारभूत शिक्षण स्तर को मजबूत करने और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।
बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि अब अगला लक्ष्य शेष कमजोर दक्षताओं पर केंद्रित प्रयास करना है, ताकि शत-प्रतिशत निपुणता प्राप्त की जा सके। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे बच्चों की बुनियादी समझ को और मजबूत करने के लिए नियमित आकलन, उपचारात्मक शिक्षण और व्यक्तिगत ध्यान की रणनीति अपनाएं।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिससे शिक्षकों में उत्साह और प्रेरणा का संचार हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे। यह आयोजन जनपद में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।