सौरभ की रिपोर्ट
सोनभद्र। घोरावल के कुशहरा में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यास वेद विभूषण पण्डित नैतिक मिश्र ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, नंदोत्सव और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बताया गया कि श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र पद मास की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में कंस के कारागार में वसुदेव और देवकी के गर्भ से हुआ। इसके बाद वसुदेव द्वारा बालक श्रीकृष्ण को गोकुल में नन्द और यशोदा के पास पहुंचाया गया, जहां भगवान ने पूतना वध, माखन चोरी जैसी अनेक दिव्य लीलाएं कीं। कथा के माध्यम से यह भी बताया गया कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
• कामदेव प्रसंग और भक्ति का संदेश बना केंद्र
कथा के दौरान कामदेव प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि कामदेव के भस्म होने के बाद उनकी पत्नी रति के विलाप पर शिवजी ने उन्हें पुनर्जीवित करने का वचन दिया, जिसके अनुसार कामदेव ने श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लिया। इस प्रसंग के माध्यम से काम भावनाओं पर नियंत्रण और आध्यात्मिक तपस्या की महिमा को बताया गया। साथ ही वामन अवतार की कथा के जरिए अहंकार त्यागकर भगवान की शरण में आने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में कमलेश मिश्र, मोहन तिवारी, अंकुल मिश्र, सोहन तिवारी, विशाल चौबे, अश्वनी मिश्र, ज्ञान प्रकाश, राम चन्द्र शुक्ल, रामानंद पाण्डेय और लवकुश पाठक सहित कई लोग उपस्थित रहे।