यशस्वी कन्नौजिया संवाददाता
ओबरा,सोनभद्र। ओबरा तापीय परियोजना के सीजीएम, प्रशासनिक अधिकारियों और मजदूरों के बीच दो दिन पहले हुए समझौते के कड़ाई से अनुपालन, डी. डी. सिंह संविदाकार के मजदूरों को काम पर तत्काल बहाल करने, पूरी परियोजना में न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक व जीवन सुरक्षा व श्रम कानून को लागू करने और 60 साल आयु पर रिटायर ठेका श्रमिकों को ग्रेच्युटी देने के सवाल पर आज ठेका मजदूर यूनियन ने ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र भेजा। इस पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई के लिए डीएम, एसपी, एसडीएम ओबरा और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है। ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष तीरथ राज यादव और संयुक्त मंत्री मोहन प्रसाद की तरफ से भेजें पत्र में कहा गया कि नोएडा मजदूर आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ पूरे प्रदेश में श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने का प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबंधन को आदेश दे रहे हैं और श्रमिकों के प्रदेश के विकास में योगदान का सम्मान करने को कह रहे हैं। वहीं ओबरा तापीय परियोजना में विधि के विरुद्ध कार्य हो रहा है। 15 अप्रैल को प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में समझौता हुआ और डी. डी. सिंह संविदाकार के अंतर्गत कार्यरत मजदूरों को कार्य पर बहाल करने की बात की गई व 26 दिन हाजिरी व न्यूनतम मजदूरी कड़ाई से देने का आदेश दिया गया। लेकिन दुखद स्थिति यह है कि आज तक इसे लागू नहीं किया गया। पूरे परियोजना में इससे औद्योगिक अशांति व्याप्त है और यदि मजदूरों को न्याय नहीं मिला तो आने वाले समय में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, संवैधानिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पत्र में कहा गया कि संविदाकार ने मिथ्या आरोप लगाते हुए सीजीएम ओबरा पर मनमानेपन और दबाव का आरोप लगाया है। प्रबंधन को भेजे पत्र में कहा है कि परियोजना में कार्यरत श्रमिकों की जगह उसे अपने श्रमिक लगाने की अनुमति दी जाए। जबकि सच्चाई यह है कि यह परियोजनाएं राष्ट्रीय महत्व की है। आम जनता के हितों की उनसे पूर्ति होती है और यह उच्च तकनीकी पर आधारित हैं। यहां दक्ष, अनुभवी व सक्षम मजदूरों की नितांत आवश्यकता है। यही कारण है कि परियोजना में संविदाकार तो बदलते हैं पर ठेका श्रमिक नही। श्रमिकों के बदलने से परियोजना में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है और सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है। बावजूद इसके मजदूरों को हटाने की बात करना राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है। जिला प्रशासन को इसको संज्ञान में लेना चाहिए और मजदूरों को काम पर रखने की कार्रवाई करनी चाहिए।