रिपोर्ट: डॉ. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र की आवश्यक बैठक राजेश जायसवाल के आवास पर हुई, जिसमें नगर की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर में जलभराव से निजात दिलाने के उद्देश्य से करीब 36 करोड़ रुपये की लागत से 13 किलोमीटर नाला निर्माण कराया गया, लेकिन 16 अगस्त की रात महज 40 मिनट की बारिश में नगर के कई हिस्से जलमग्न हो गए और गलियों के साथ लोगों के घरों में भी पानी घुस गया। जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि इससे नाला निर्माण की डीपीआर, डिजाइन, क्षमता और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि नाला निर्माण शुरू होने के दौरान संगठन ने 4 जुलाई 2025 को सीएनडीएस के सहायक अभियंता को ज्ञापन देकर डीपीआर को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद जनपद भ्रमण पर आए पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष को भी ज्ञापन देकर अनियमितताओं से अवगत कराया गया था, लेकिन संगठन के अनुसार मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
कौशल शर्मा ने कहा कि विकास की सार्थकता निर्माण की लागत से नहीं, बल्कि उसके परिणाम से तय होती है। यदि थोड़ी देर की बारिश में सड़कें और बाजार जलमग्न हो जाएं तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने पानी भर जाए तो यह जल निकासी व्यवस्था और नियोजन की कमी का संकेत है। उन्होंने कहा कि हाल में बनी सड़कें भी नालियों में पानी की निकासी नहीं होने से जगह-जगह खराब होने लगी हैं और गड्ढे बन रहे हैं। संगठन ने मांग की कि संबंधित विभाग द्वारा नाला निर्माण की डीपीआर और तकनीकी स्वीकृति की समीक्षा, निर्माण कार्य की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच तथा जल निकासी क्षमता का स्थलीय परीक्षण कराया जाए। साथ ही निर्माण से पहले वर्षा जल की मात्रा, क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का अध्ययन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जाए। संगठन ने नगर के लिए टुकड़ों में निर्माण के बजाय समग्र एवं वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान तैयार करने की मांग की। बैठक में प्रितपाल सिंह, राजेश जायसवाल, जसकीरत सिंह, प्रशांत जैन, राजू जायसवाल, शरद जायसवाल, सिद्धार्थ सांवरिया, सूर्या जायसवाल, अभिषेक साहू, अभिषेक केसरी, गुरप्रीत सिंह, दीप सिंह पटेल, नागेंद्र मोदनवाल, पंकज कनोडिया, प्रदीप जायसवाल, अमित अग्रवाल, टीपू अली, यशपाल सिंह और मंटू केसरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।