अजीत पाण्डेय संवाददाता
बभनी(सोनभद्र)। बभनी थाना क्षेत्र अंतर्गत नधिरा-किरबिल के वन क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण के कार्य में कथित रूप से नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। बताया गया कि वन क्षेत्र में पौधों की सुरक्षा, निराई-गुड़ाई सहित अन्य कार्यों के लिए कुछ बच्चों के कार्य करने की जानकारी मिलने पर विहिप प्रखंड संयोजक हर्षित दुबे मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां बच्चों को कार्य करते हुए देखे जाने की बात कहते हुए तत्काल संबंधित उच्चाधिकारियों एवं श्रम विभाग को सूचना देकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार मौके पर दिल्बरन उम्र 12 वर्ष, रवींद्र 13 वर्ष, संदीप गौड़ 12 वर्ष, संजय गौड़ 11 वर्ष, नीरज गौड़ 10 वर्ष और महेश कुमार गौड़, निवासी साहगोड़ा, कार्य करते हुए मिले। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से बच्चों के सुबह से ही कार्य करने की बात कही गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ म्योरपुर रेंजर जाबर सिंह, वन दरोगा शिव मंगल और चंद्रभान पटेल भी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। अधिकारियों की मौजूदगी में बच्चों को मौके से उनके घर पहुंचाया गया।
• मेडिकल परीक्षण और जांच के बाद स्पष्ट होगी बच्चों की उम्र, नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन
इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई। वहीं विहिप प्रखंड संयोजक हर्षित दुबे ने नाबालिग बच्चों से कार्य कराए जाने की शिकायत को बाल श्रम कानून से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की। उन्होंने सरकारी कार्य में बच्चों के लगाए जाने की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई की मांग की। हर्षित दुबे के अनुसार बच्चों ने अधिकारियों के समक्ष यह भी बताया कि उनसे सुबह करीब 8 बजे से शाम 5 बजे तक निराई-गुड़ाई का कार्य कराया जा रहा था। हालांकि बच्चों की उम्र और कार्य से संबंधित वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी म्योरपुर जाबर सिंह ने बताया कि मौके पर मिले बच्चों के नाम श्रम विभाग को उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को सोमवार को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा जाएगा और यदि जांच में बच्चे नाबालिग पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और मेडिकल परीक्षण तथा संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों से कराया जा रहा कार्य किस प्रकृति का था, उनकी उम्र क्या है और इस संबंध में नियमों के तहत किसकी जिम्मेदारी निर्धारित होती है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।