शिवेंदु श्रीवास्तव की रिपोर्ट
सोनभद्र। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सेवानिवृत्त अधिकारी को न्यायिक अधिकारियों और शासन के अधिकारियों का भय दिखाकर करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई थी। सोनभद्र एसपी अभिषेक वर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस ने ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार, 2.10 लाख रुपये नकद और करीब 75 लाख रुपये की होल्ड/फ्रीज धनराशि बरामद की है। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता का फर्जी आईडी कार्ड और पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर एआई तकनीक का दुरुपयोग कर डीपफेक इमेज और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले गिरोह ने पीड़ित को न्यायिक अधिकारियों और शासन के अधिकारियों का डर दिखाया और अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर कराई। पीड़ित से लगातार पैसों की मांग की जा रही थी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना सोनभद्र पुलिस ने जांच शुरू की। बैंक अधिकारियों से मिली सूचना के आधार पर ठगी की रकम से जुड़े खातों पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई और आरोपियों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण कुमार दुबे, प्रियंका मिश्रा और तेजल के रूप में बताई गई है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार, 2.10 लाख रुपये नकद और करीब 75 लाख रुपये की होल्ड/फ्रीज धनराशि बरामद की है। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता का फर्जी आईडी कार्ड और पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर एआई तकनीक का इस्तेमाल कर डीपफेक इमेज और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। इनका इस्तेमाल पीड़ित पर दबाव बनाने और डिजिटल अरेस्ट का भय पैदा करने के लिए किए जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस मामले में साइबर ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका और ठगी की रकम के लेनदेन से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा है।