मनीष कुमार संवाददाता
दुद्धी(सोनभद्र)। श्री रामलीला मंच पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा वाचक बाल व्यास मानस जी महाराज ने भक्तों को भागवत ज्ञान का महत्व बताते हुए कहा कि भागवत भक्ति और नई चेतना का निर्माण करती है, जो भक्त और भगवान के प्रेम को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति संतों के सत्संग का रसपान करता है, तब वह भगवान के ममत्व की ओर आकर्षित हो जाता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में रहने वाला व्यक्ति दूसरे के दुख को अपने दुख के समान समझता है। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि द्रौपदी ने अपने पुत्रों की हत्या के बाद भी अश्वत्थामा को क्षमा करने की बात कही थी, क्योंकि वह गुरु माता के दुख को समझती थीं।
• कथा पंडाल में लोगों ने लिया मांसाहार छोड़ने का संकल्प
मानस जी महाराज ने कहा कि भागवत ज्ञान जीव दया, सत्य, प्रेम, करुणा और परोपकार का संदेश देता है तथा भगवान ने सभी जीवों में अपना अंश बताया है। उन्होंने भगवान के विभिन्न अवतारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को किसी भी जीव को आहार बनाने से पहले भगवान के स्वरूप को स्मरण करना चाहिए। कथा के दौरान बाल व्यास ने पंडाल में उपस्थित लोगों से जीवों पर दया करने और मांसाहार छोड़ने का आग्रह किया। इस पर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर मांसाहार त्यागने का संकल्प लिया और जयकारों के साथ इसका समर्थन किया।